आँगन से गायब, लैपटॉप पर प्रगट


एक पिद्दी सी लगने वाली चिड़िया इतनी खतरनाक हो सकती है कि उसकी वजह से खतरों के खिलाडी शशि थरूर भी थर्रा जाये इस बात का अंदाज़ा नहीं था...थरूर साहब कि कुर्सी चली गयी इस ट्विट ट्विट के चक्कर में....यही नहीं दुनिया का सबसे बड़ा गेम शो विवादों के साये में आ जाये वोह भी एक चिड़िया के ट्विट ट्विट से....क्या कहने...वैसे अब ट्विट ट्विट करने के लिए इस चिड़िया को कहीं घर के बाहर उग आये झुरमुट में नहीं आना पड़ता....यह तो हमारे चौखटे चेहरे वाले कंप्यूटर के आसमान पर आती है....दो चार लाइने गाती है और हंगामा बरपाती है....
मीडिया वालों के नज़र से देखा जाये तो लगता है कि आज पूरा देश बस हर काम छोड़ कर इसी ट्विट का ही इंतज़ार कर रहा है....सूत्र बताते हैं कि आजकल कई बड़े चैनल वाले तो ट्विटियाने वाले पत्रकारों कि भर्ती करने कि सोच रहे हैं... उनका काम बस यही होगा कि दिन भर ट्विटियाते रहो...और कहीं से कोई थरूर या मोदी ट्विट ट्विट करें बस शुरू हो स्पेशल करने के लिए.... वैसे जिस तरीके से मीडिया वाले ट्विट के पीछे पड़े और राष्ट्रीय हित में इससे उपजी खबर को दिखा रहें उससे लगता है कि जल्द ही प्रधानमन्त्री कार्यालय भी इस सम्बन्ध में एक नया मंत्रालय ही बना सकता है...
वैसे आपको याद होगा कि कुछ वर्षो पहले तक ऐसी ही ट्विट हमारे और आपके घरो में भी सुनाई देती थी....आँगन हो, बरामदा हो, खिड़की हो, रोशनदान हो हर जगह एक प्यारी गौरया कि ट्विट सुनायी देती थी....लेकिन अब ऐसा नहीं है....गौरया अब ढूंढे नहीं मिलती है.....पहले जब घर में चावल बनाने से पहले उसे साफ़ किया जाता था तो उसमे से निकले धान को माँ खुली जगह पर रख देती थी...गौरया का झुण्ड वहां आता और धान अपनी चोंच से धान और चावल को अलग करता और लेकर उड़ जाता....अक्सर गौरया का एक बड़ा झुण्ड गर्मी कि दोपहर में घर के बाहर लगे झुरमुट में चला आता....देर तक शोर करता और शाम को उड़ जाता....खुली खिड़कियों से कमरे के अन्दर तेजी से उड़ते हुए इस कोने से उस कोने का चक्कर लगाती गौरया को हम बाहर भगाते थे....हमें डर लगता था कि कहीं कमरे में चलते पंखे से वोह कट ना जाये...घर के उपरी हिस्से में बने रोशनदान पर अक्सर यह गौरया घोंसला बनाती थी...हम गौरया के बच्चे को बड़ा होते देखते, उन्हें छोटे छोटे पंखो से ऊँची उड़ान भरने कि कोशिश करते देखते थे....अब ऐसा कोई नज़ारा नहीं दिखता...ना आँगन, ना रोशनदान और ना ही घरों के बाहर लगे झुरमुट में...ज़िन्दगी का ट्विट सुनाने वाली गौरया अब खामोश है ...बड़े बुजुर्ग कहते थे कि जिस घर में गौरया का आना जाना होता है वहां कोई बीमार नहीं होता...अब तो पूरे मोहल्ले के किसी भी घर में कोई गौरया नहीं जाती..तो क्या पूरा मोहल्ला ही बीमार हो गया?
ट्विट तो अब लैपटॉप पर सुनाई देती है ...मीडिया वाले भी इसी चौखटे चेहरे वाली ट्विट के इंतज़ार में रहते हैं.....आखिर क्यों ना हो आँगन कि गौरया टीआरपी भी तो नहीं देती......

3 टिप्‍पणियां:

  1. बढिया लिखा है। टविट और गौरेया की तुलना भली लगी।

    उत्तर देंहटाएं
  2. मोह्हल्ला ही नहीं सारा देश बीमार है 'भ्रष्टआवरण ' के इस रोग से।

    उत्तर देंहटाएं
  3. एक के टिविटियाने पर हंगामा बरपा है दूसरी के न टिविटियाने ( अब दिख नहीं रही हैं न गौरैय्या ) पर भी उतना ही हंगामा बरपे तो क्या बात हो । दिलचस्प लिखा है आपने

    उत्तर देंहटाएं