इस बार कलमाड़ी कैसे रहेंगे?


लीजिए आ गया एक बार फिर छुट्टी वाला दिन। वही दिन जिसकी छुट्टी आपके कैलेंडर में कभी इधर से उधर नहीं होती। वही दिन जब लाल किले की प्राचीर पर भारत तिरंगा फहराता है इंडिया छुट्टी मनाता है। पता नहीं क्यों लेकिन लगता है कि अब शायद ऐसे त्यौहारों पर लोगों में उत्साह नहीं होता। हो सकता है बार-बार एक ही जगह एक जैसा ही प्रोग्राम करने से लोगों में दिलचस्पी कम हो गई हो। इस बारे में मेरा एक सुझाव है। इससे 15 अगस्त के जश्न का जोश दुगुना हो सकता है।
हमें इस बार झण्डा फहराने के स्थान में थोड़ा परिवर्तन करना चाहिए। इस बार झण्डा फहराने के लिए हमें उस स्टेडियम का इस्तमाल करना चाहिए जिसका उपयोग कामन वेल्थ खेलों की ज्यादातर स्पर्धाओं के लिए हुआ है। वहां हम सब को एकत्र होना चाहिए और झण्डा फहराना चाहिए। आखिर यही जगह तो है जहां हमारे देश ने अपनी प्रगतिशीलता अन्य देशों के सामने बताई।
अब सवाल ये है कि हर बार देश का प्रधानमंत्री ही लाल किले की प्राचीर से 15 अगस्त को तिरंगा क्यों फहराये। क्या देश में कोई और नहीं है जो प्रधानमंत्री को थोड़ी राहत दे सके। मेरे पास इसका जवाब है। है ना। अपने कलमाड़ी जी। कसम से ऐसा योग्य और सुशील व्यक्ति मिलना मुश्किल है। देश की बागडोर ऐसे ही आदमी के हाथों में होनी चाहिए। कलमाड़ी जी कि योग्यता कितनी है इस बारे में न जाने कैग की कितनी रिपोट्र्स लिखीं जाएंगी। लेकिन इसके बावजूद कलमाड़ी पुराण खत्म नहीं हो पाएगा। महज एक खेल आयोजन कराने में जो कई अरबों का खेल कर सकता है उसकी योग्यता पर शक करने का तो सवाल ही नहीं उठता। सोचिए कितना अच्छा लगेगा जब कलमाड़ी जी अपने हाथों से तिरंगा फहराएंगे। सच कहता हूं एक बार आजमा के देखने में कोई हर्ज नहीं है। 

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