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उम्र का क्या दोष

क्यों हवाला देते हो उम्र का
उम्र का क्या दोष
आखिर इसे भी तो बचपन पसंद है
यह मजबूरी इसकी भी तो है
यह खुद को बढ़ने से रोक नहीं सकती
हर वक़्त हर पल यह बढ़ रही है
इसमें क्या गलती है इसकी
हाँ तुम चाहो तो खुद को
अपनी उम्र से अलग कर लो
फिर तुम्हे बूढे होने का डर नहीं होगा
लेकिन रुको
जरा यह भी तो सोचो
इसी उम्र ने ही तो
तुम्हे सुख दिया है बचपन का
फिर कैसे अलग करोगे
रहने दो
इस उम्र को अपने साथ
शायद फिर बचपन लौट आये.......
आशीष तिवारी

ज्ञानमती का हौसला

यूँ तो ज़िन्दगी हर कदम एक नई ज़ंग होती है...लेकिन इस ज़ंग को जीत पाने का हौसला कम ही लोगों में होता है..वोह भी तब जब ज़िन्दगी कि ज़ंग को लड़ने वाला कोई महिला हो....उससे उसके ही समाज ने बहिष्कृत कर दिया हो और वोह एच आई वी पोजिटिव भी हो...हाँ ठीक पढ़ा आपने वोह एच आई वी पोजिटिव भी हो....यह दांस्ता है बनारस के ज्ञानमती की....ज्ञानमति युवा हैं...उच्च शिक्षा प्राप्त है...ज्ञानमती ने एमएस सी किया उसके बाद एम बीभी कर चुकी हैं....देखने में ज्ञानमती कहीं से भी किसी आम लड़की से अलग नही लगती हैं...लेकिन हमारा सभ्य समाज इन्हे अलग मानता है...जानते हैं क्यों क्योंकि ज्ञानमती को एड्स है ....

ज्ञानमती को एड्स कैसे हुआ यह एक दर्दभरी कहानी है..दरअसल ज्ञानमती को सिजोफेर्निया कि बीमारी हो गई थी......इसी बीमारी में ज्ञानमती के साथ हुयी एक दुर्घटना ने ज्ञानमती को एच आई वी पोजिटिव बना दिया...(पत्रकारिता के धर्मं को मानते हुए में ज्ञानमती के साथ हुए अपने समस्त वार्तालाप को यहाँ नही लिख सकता हूँ) जब बिमारी के इलाज के दौरान ज्ञानमती को यह पता चला कि वोह एच आई वी पोजिटिव हो गई हैं तो उनके ऊपर मानो पहाड़ टूट पड़ा...एक अच्छी खासी पढ़ी लिखी लड़की जो अपने भविष्य को लेकर न जाने कितने सपने सजा कर बैठी थी सब लगा मानो चूर चूर हो गए..ज्ञानमती के दर्द की कल्पना भर भी आप नही कर सकतें हैं...ज्ञानमती को हुयी सिजोफेर्निया की बिमारी अब धीरे धीरे ठीक होने लगी थी लेकिन इस बीमारी ने एक ऐसा ज़ख्म दे दिया था जो पूरी ज़िन्दगी नही भर सकता है....ज्ञानमती कब एच आई वी पोजिटिव हो गयी उससे पता भी नहीं पता चला...यहीं से ज्ञानमती की ज़िन्दगी ने करवट लेनी शुरू कर दी...इलाज के दौरान कुछ चेकअप्स में डॉक्टर को पता चला की ज्ञानमती एच आई वी पोजिटिव है यह बात उसने ज्ञानमती को तो बताई लेकिन उसके पैरेंट्स को नहीं बताई....बात पैरेंट्स की हो रही है तो लगे हाथों उनके बारें में भी आपको कुछ बता दूं....दरअसल ज्ञानमती एक बहुत अच्छे घर की लड़की है...इसके पिता एक विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे...माँ घरेलु महिला हैं...अच्छा कुलीन परिवार है एक भाई भी है....खैर, आगे बताता हूँ ज्ञानमती के सीने में डॉक्टर ने दो-दो दर्द एक साथ दे दिए थे..पहला तो यह की वोह एच आई वी पोजिटिव है दूसरा यह की इसके बारे मैं घर वालों को मत बताना....ज्ञानमती काफी दिनों तक इस राज को अपने घरवालों से छुपाये रही लेकिन आखिरकार उससे रहा नहीं गया और उसने अपनी बीमारी के बारे में घरवालों को बता दिया...इसके बाद ज्ञानमती के प्रति घरवालों के रवैया बदलने लगा....बात बात में कभी कभी उसे इस बात का एहसास दिलाया जाने लगा की वोह एक एच आई वी पोजिटिव लड़की है...अब ज्ञानमती का दम घर में घुटने लगा...कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या करें...लेकिन उसने हार नहीं मानी...उसने एच आई वी पोजिटिव लोगों के नेटवर्क 'नेटवर्क पोजिटिव' से संपर्क किया....उन लोगों के साथ आकर ज्ञानमती को मनो एक नयी ज़िन्दगी मिली....इस नेटवर्क में ऐसे लोग ही आतें हैं जो एच आई वी पोजिटिव हैं...ये नेटवर्क एच आई वी पोजिटिव लोगों के लिए कई सहायतायें उपलब्ध करता है.( इस नेटवर्क के बारे में कभी और विस्तार से बतायूंगा..अभी बात ज्ञानमती की ही करूंगा, क्षमा करें)...इस नेटवर्क के लोगों के सहयोग से ज्ञानमती का मानसिक रोग बहुत हद तक ठीक कर दिया गया है...अब तो ज्ञानमती एच आई वी पोजिटिव लोगों की काउंसिलिंग करती है...उन्हें ज़िन्दगी से लड़ना सिखाती है....ज्ञानमती अब अपने घर नहीं जाती वोह अपनी संस्था में ही रहती है....ज्ञानमती अब ज़िन्दगी से लड़ सकती है...हाँ एक और बात बताता हूँ...ज्ञानमती अब शादी करने वाली है...उसके लिए एक इंजिनियर लड़के का रिश्ता आया है....लड़का अच्छी नौकरी करता है...हाँ यह ज़रूर है की वोह भी एक एच आई वी पोजिटिव है...लेकिन एक नयी ज़िन्दगी की शुरात के ज़ज्बा उसमे भी है....शादी की बात लगभग हो चुकी है...सबकुछ ठीक ठाक रहा तो जल्द ही शादी हो जायेगी....
तो यह थी वोह दास्ताँ जो बहुत कुछ कह रही है हमसे...जब मैं ज्ञानमती से बात कर रहा था उसकी आँखों में आंसू आ गए थे मुझे लगा कहीं वोह रो न दे...मैं कैमरामैन से कैमरा बंद करने के लिए कहने ही वाला था की ज्ञान मति ने अपने आप को संभाल लिया...हमारा कैमरा बंद नहीं हुआ...यहाँ ज्ञानमती ने अपनी उस मजबूती का परिचय दिया था जो आम एच आई वी पोजिटिव लोगों में नहीं होता है....लेकिन ज्ञानमती तो मजबूत हो गयी लेकिन क्या आप और हम हो पायें? क्या हमारी सोच ऐसे लोगों के प्रति बदली.....क्या सिर्फ एड्स से बचाव के उपायों पर चर्चा कर हमारी जिम्मेदारी पूरी हो जाती है....सोचिये...क्या आप को ज्ञानमती अपनी शादी में बुलाएगी तो आप जाना पसंद करेंगे? वोह एक एच आई वी पोजिटिव है....! मुझे भी बताईयेगा.....

इंसानियत की इबादतगाह

आज आपको एक ऐसी इबादतगाह के बारे मैं बताता हूँ जहाँ दरअसल इंसानियत की पूजा होती है....यह इबादतगाह है हमेशा से अपनी गंगा जमुनी तहजीब के लिए जाने जाये वाले शहर बनारस में है....बनारस के चौक इलाके की एक तंग गली...इसी गली में है यह इबादतगाह....मैं बात कर रहा हूँ अनार वाली मस्जिद का.....इसको अनार वाली वाली मस्जिद कहने के पीछे कारण है इस मस्जिद में लगा अनार का पेड़....इसी पेड़ के चलते इस मस्जिद का नाम अनार वाली मस्जिद पड़ गया......यह एक छोटी सी मस्जिद है.....एक तरफ नमाज़ अदा करने के लिए एक छूता सा कमरा बना है तो वहीँ दूसरी ओर चार दरवेश को जगह मिली हुई है.......एक छोटा सा ही आँगन जहाँ किनारे में लगा अनार का पेड़ पूरी मस्जिद को अपने साये तले लिए हुए है.....इस मस्जिद के साथ जुडी हुई एक ख़ास बात यह है की इस पूरी मस्जिद की देखभाल एक हिन्दू के हाथ में है....लम्बी दाढी और लम्बे लम्बे बाल वाले बेचन बाबा....यही नाम है उस शख्स का जो इस मस्जिद की देखरेख करता है....बेचन बाबा यहाँ झाडू लगाने से लेकर नमाज़ अदा करने तक की हर जिम्मेदारी को उठातें हैं.......बेचन बाबा इस काम को पिछली चार पीढियों से कर रहें हैं.......बाबा पूरी अकीदत के साथ इस मस्जिद की देखरेख करतें हैं........इस बात की परवाह न करते हुए की एक मस्जिद की हिफाज़त एक हिन्दू के हाथ में है यहाँ के मुस्लिम भी बेचन बाबा को पूरा सम्मान देते हैं........एक बात और बताता हूँ....बाबा के घर में हिन्दू देवी देवतावों की पूजा होती है.....पत्नी माता शीतला की पूजा करती है तो बेटा भगवान् शिव का भक्त है...लेकिन बाबा मस्जिद की चाहरदीवारी पर मत्था टेकते हैं....इस मस्जिद में उर्स मनाया जाता है, १५ अगस्त और २६ जनवरी भी....यह मस्जिद जिस गली में है वोह बनारस की आम तंग गलियों की ही तरह है...यहाँ हर तरफ कई दुकाने हैं......इन दुकानों के मालिक और वहां काम करने वाले कई लोग ऐसें हैं जिनकी दिनचर्या इस मस्जिद में आये बगैर शुरू ही नहीं होती...इनमे से अधिकतर हिन्दू ही हैं क्यों की आसपास मुस्लिम आबादी नहीं है...इसी मस्जिद के ठीक बगल में गोपाल मंदिर है...कई हिन्दू ऐसे हैं जो मंदिर और मस्जिद में एक साथ दर्शन करते हैं.......दुआ मांगते हैं....
कई सौ सालों से इस गली में कड़ी यह मस्जिद वाकई में अपने आप में अनोखी है...यहाँ जात पात की तो मानो कोई लकीर ही नहीं है.....शुक्र है ऊपर वाले का इस मस्जिद पर देश की किसी नेता की नज़र नहीं पड़ी.........