कैसी रही चाय साहब?

>> धमाके के वक़्त पुलिस के बड़े अफसर के घर चल रहा था जश्न.

यह सवाल आपको कुछ अटपटा सा ज़रूर लग सकता है लेकिन सवाल जायज है. दरअसल ये सवाल इसलिए कर रहा हूँ क्योंकि मंगलवार 6 दिसम्बर को जिस वक़्त वाराणसी के शीतला घाट पर बम धमाका हुआ ठीक उसी समय जिले के आला अफसर चाय पार्टी में व्यस्त थे. आप को हैरानी होगी ये जानकार कि ये चाय पार्टी दी किस ख़ुशी में गयी थी. दरअसल 6 दिसम्बर की बरसी शहर में शांतिपूर्वक बीत गयी इसका जश्न मनाया जा रहा था. शहर पुलिस महकमे के सबसे बड़े अफसर के बंगले पर इस पार्टी का आयजन किया गया था. बाकायदा पत्रकारों को फ़ोन करके इस पार्टी में बुलाया गया था. खुद एसपी सिटी ने मेरे एक पत्रकार मित्र को फ़ोन किया और चाय पार्टी का निमंत्रण दिया. कारण बताया कि 6 दिसम्बर की बरसी शांति पूर्वक बीत गयी इसलिए जश्न मानेगे. कोशिश थी कि अपनी पीठ खुद ठोक ली जाये. यानी साफ़ है कि 6 दिसम्बर बीत जाने के बाद सभी अधिकारिओं ने मान लिया था कि अब कुछ नहीं होने वाला है. इसी लापरवाही का फायदा उठा लिया इंडियन मुजाहिदीन ने.
सूत्रों की हवाले से ख़बर है कि लास्ट के एक दिन पहले तीन संदिग्ध लोग इस इलाके में देखे गए थे. इसके बावजूद पुलिस और खुफिया विभाग ने कोई विशेष सतर्कता नहीं बरती. तुर्रा यह कि पुलिस ने कहा कि हम लोगों ने इलाके की सघन तलाशी ली थी अब आप ही सोच ले कि पुलिस की ये सघन तलाशी कितनी विरल थी. ऐसा नहीं है कि इंडियन मुजाहिदीन के आतंकवादियों ने हाथ घुमाया होगा और बम शीतला घाट पर रखे कूड़ेदान में पहुँच गया होगा. इसके लिए बाकायदा रेकी हुयी होगी. कहीं स्थानीय ठिकाना बनाया होगा. कुछ दिनों तक हर चीज़ पर नज़र रखी होगी. तब जाकर पूरी घटना को अंजाम दिया होगा. यही नहीं 6 दिसम्बर को अगर पुलिस इतनी सतर्क थी तो भला आतंकवादी शहर में कैसे टिके रह गए? साफ़ है कि खुफिया तंत्र यहाँ नाकाम साबित हुआ.