कश्मीर को ज्यादा ज़रुरत है अन्ना की

पिछले दिनों कश्मीर के मुद्दे पर प्रशांत भूषण के बयान से अन्ना का किनारा कसना इस बात की ताकीद करता है कि अन्ना हजारे कश्मीर के बारे में उसी तरह से सोचते हैं जिस तरह से सरहद पर अपने मुल्क की सलामती के लिए खड़ा एक सिपाही सोचता है। यही वजह रही होगी कि प्रशांत भूषण पर हमले के कुछ देर बाद जब पत्रकारों ने अन्ना से इस संबंध में प्रतिक्रिया लेनी चाही तो वह चुप लगा गये। साफ है कि आदर्श बुद्धिजीविता का वह स्तर जहां कश्मीर को भारत से अलग कर देने की सलाह दी जाती है अन्ना वहां नहीं पहुंचे हैं। अन्ना हजारे अब भी एक सैनिक की तरह सोचते हैं जो कश्मीर को कभी इस देश से अलग रख कर नहीं सोच सकता। अन्ना हजारे का मौन व्रत भी इस बारे में उठने वाले सवालों से बच निकलने का एक जरिया हो सकता है।
अन्ना हजारे देश से भ्रष्टाचार खत्म करने की कोशिश में लगे हुये हैं और उनका एक सहयोगी भ्रष्टाचार से परेशान प्रदेशों को ही खत्म कर देना चाहता है। कश्मीर समस्या से जुड़े कई पहलुओं में एक भ्रष्टाचार का पहलू भी है। केंद्र सरकार ने अपनी प्राथमिकता की सूची में कश्मीर को सबसे उपर रखा है। देश के वार्षिक बजट का एक बड़ा हिस्सा कश्मीर को दिया जाता है। लेकिन दुख की बात यह है कि केंद्र की ओर से कश्मीर को मिलने वाली इस सहायता की बंदरबांट हो जाती है। वर्ष 2009-2010 में कश्मीर को विकास की योजनाओं पर खर्च करने के लिए 13, 252 करोड़ रुपये दिये गये। वहीं पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को कुल मिलाकर 29, 084 करोड़ का बजट आवंटित हुआ। साफ है कि केंद्र सरकार ने खुले हाथ से लुटाया और कश्मीर की अफसरशाही ने बटोरा या फिर खर्च ही नहीं कर पाये। कश्मीर समस्या के लगातार इतने दिनों तक बने रहने के पीछे एक वजह वहां व्याप्त भ्रष्टाचार भी है। बिहार, उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश जैसे प्रदेशों से अधिक बजट कश्मीर को आवंटित होता है। लेकिन विकास के मामले में कश्मीर इन प्रदेशों से पीछे है। इसकी वजह फंड का सही तरीके से खर्च न हो पाना है। विकास के कई कार्य ऐसे हैं जो देश के अन्य राज्यों और कश्मीर में एक साथ चल रहे हैं। ऐसे कार्यों में भी कश्मीर पिछड़ा हुआ है। यहां तक कि सामाजिक क्षेत्रों के लिये भी मिलने वाले कार्यों मसलन शिक्षा और स्वास्थ्य में भी कश्मीर केंद्र सरकार से मिलने वाले धन को पूरी तरह खर्च नहीं कर पा रहा है। 
विकास कार्यों पर समुचित ध्यान न देना भी कश्मीर की समस्या को बढ़ावा देना है। कुछ दिनों पूर्व हुये एक सर्वे में खुलासा हुआ कि भ्रष्टचार के मामले में जम्मू-कश्मीर अन्य प्रदेशों से बहुत आगे है। स्पष्ट है कि पैसे के खेल में कश्मीर जन्नत से जहन्नुम बनता जा रहा है। टीम अन्ना भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी अपना आंदोलन अगर कश्मीर में भी चलाये तो समस्या को दूर करने में सहयोग मिल सकता है और विकास की राह पर चलते प्रदेश को देख कर अलगाववादियों के हौसले भी पस्त हो जायेंगे.