एक पंद्रह अगस्त यहां भी मना लेकिन झंडा नहीं फहरा, बस चली ताकि बच्चियां स्कूल ना छोड़ें

कैसी कैसी दास्तां है इस देश में। अब यही दास्तां ले लीजिए जिसका जिक्र हम अपनी इस पोस्ट में करने जा रहें हैं। दरअसल राजस्थान के सीकर इलाके में एक डॉक्टर दंपत्ति ने इलाके में स्कूल जाने वाली लड़कियों को बस दी। डाक्टर दंपत्ति के लड़कियों के लिए बस उपलब्ध कराने के पीछे की वजह हमारे समाज के लिए कलंक है। फिर भी आपके लिए जानना जरूरी है।
दरअसल डाक्टर आर पी यादव को किसी पारिवारिक काम से सीकर के नीम का थाना इलाके से आना जाना हुआ। कार से आते जाते उन्होंने मिट्टी से सने रास्तों पर स्कूल से लौटती बच्चियों को देखा। लड़कियों की परेशानी देखकर डाक्टर यादव ने कुछ बच्चियों को अपनी गाड़ी में लिफ्ट दे दी। रास्ते में बातचीत के दौरान पता चला कि इलाके की लड़कियों को मिट्टी से सने रास्ते पर चलने से बड़ी एक परेशानी का सामना करना पड़ता है। दरअसल स्कूल आने जाने के दौरान इन लड़कियों को छे़ड़खानी का सामना करना पड़ता। हालात ऐसे थे कि कई बच्चियों ने पढ़ाई तक छोड़ दी थी।
डाक्टर साहब को ये बात अंदर तक चुभ गई। गाड़ी में बैठे बैठे डाक्टर साहब ने मानों प्रण ले लिया। बच्चियों को गाड़ी से उतारने के बाद डाक्टर जब घर पहुंचे तो अपने प्रोविडेंट फंड का हिसाब लगाया। पता चला 19 लाख रुपए पड़े हैं। पंद्रह अगस्त करीब था। डाक्टर साहब पास के बसों के शोरूम में पहुंचे और लड़कियों को घर से स्कूल लाने ले जाने के लिए एक बस बुक करा दी।
अब ये बस लड़कियों के लिए उपलब्ध हो चुकी है। खास बात ये है कि बच्चियों के लिए ये बस पूरी तरह से निशुल्क है। बच्चियों से इस बस में सवार होने का एक पैसा नहीं लिया जाता। फिलहाल इस बस में आने जाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वाली लड़कियों की संख्या 54 हो चुकी है।
डाक्टर यादव और उनकी पत्नी खुश हैं। बच्चियों को अब कोई छेड़ता नहीं है। मिट्टी से सने रास्तों पर हमारी बेटियों को चलना नहीं पड़ता।