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भोजपुरी एक पूरी संस्कृति है......

देश के पहले भोजपुरी न्यूज़ चैनल में काम करते हुए एक साल से अधिक का समय बीत चुका है....इस दौरान मैंने इस भाषा को बेहद करीब से देखने कि कोशिश भर कि है..साथ ही यह भी जान गया कि यह ना सिर्फ उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में प्रमुखता से बोली जाने वाली एक मीठी बोली है बल्कि इस भाषा के इर्द गिर्द एक पूरी संस्कृति ही लिपटी है.....ख़ास बात यह है कि इस चैनल में ना सिर्फ उत्तर प्रदेश कि भोजपुरी बल्कि बिहार और झारखण्ड कि मैथली, छोटा नागपुरी, अंगिका जैसी भाषायों को भी जगह दी जाती है....यह अपने आप में एक नया और मेरी समझ से अच्छा प्रयोग है..इस चैनल ने उत्तर प्रदेश, बिहार , झारखण्ड जैसे इलाकों के लोगों को उनकी ही भाषा में उनसे जुडी ख़बरें दिखायीं हैं....एक सबसे बड़ी बात जो शायद इन इलाके के लोगों को बेहद अच्छी लगेगी वोह है ख़बरों को प्रोफाइल के नजरिये से ना देखने कि आज़ादी....अक्सर ऐसा होता है कि हिंदी भाषी न्यूज़ चैनल्स पर इन इलाकों कि दास्ताँ बयां करने वाली ख़बरें प्रोफाइल के अभाव में गिर जाती हैं.....लेकिन हमार टीवी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखण्ड कि जमीं से जुडी ख़बरें दिखा रहा है.....गाँव गिराव कि ख़बरें जब स्क्रीन पर आती है तो एक अजीब सा सुख मिलता है...आखिरी आदमी तक पहुँच बनाने कि कोशिश कर रहा है हमार टीवी....यहाँ अगर महुआ का नाम नहीं लिया जाये तो शायद बेमानी होगी.....बल्कि सच तो यह है कि भोजपुरी चैनल का पर्याय महुआ हो चला है...लेकिन इस सब के बीच संतोष इस बात का है एक भाषा, एक संस्कृति अब बची रहेगी.....राउर सब क का विचार बा हमरा के ज़रूर लिखी............